साहित्यकारों ने पंडित यज्ञदत्त त्रिपाठी को किया याद, अमरेंद्र पौत्स्यायन के “मखमली धूप में” काव्य को सराहा

जालौन: रविवार का दिन जनपद के इतिहास में साहित्यिक गतिविधियों के लिए तब अविस्मरणीय बन गया जब मुर्धन्य साहित्यकार पंडित यज्ञदत्त त्रिपाठी के जन्मदिन और डॉ.अमरेंद्र पौत्स्यायन द्वारा रचित “मखमली धूप में” काव्य संग्रह पुस्तक का विमोचन समारोह विविध रंगों से एक साथ सराबोर हो गया।

पहले सत्र में पुस्तक समीक्षा में विद्वान जनों ने काव्य संग्रह को साहित्य संवर्धन और सामाजिक उपादेयता की महत्वपूर्ण पहल बतलाया तो वही देर शाम तक चली. दूसरे सत्र में गीत गजल शायरी और कविताओं के साथ-साथ संगीत प्रस्तुतियों ने आयोजन को यादगार बना दिया. कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार पंडित यज्ञदत्त त्रिपाठी ने व खूबसूरत संचालन सुप्रसिद्ध शायर शफीकुर्रहमान कश्फी ने किया.

उत्तर प्रदेश साहित्य सभा एवं पहचान संस्था के संयुक्त तत्वाधान में नगर स्थित विजय विक्रम रिसोर्ट में आयोजित समारोह के प्रथम सत्र में डॉ अमरेंद्र कुमार पौस्त्यायन रचित काव्य संग्रह “मखमली धूप में’ का विमोचन और उसके बाद उसकी समीक्षा की गई. जिसमें विद्वान जनों ने काव्य संग्रह को समाज के लिए आईने की भूमिका निभाने वाली रचना बतलाया. विद्वतजनों ने कहा कि डॉ अमरेंद्र रचित यह पुस्तक साहित्य संवर्धन के साथ-साथ बहुत सी ऐसी सामाजिक अनुभूतियों को उजागर करती है जो समाज को दिशा देने का काम करेगी.

अतिथि के तौर पर पधारे इफ्तिखार अहमद जिला कार्यक्रम अधिकारी, रामदत्त प्रजापति जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, योगेश कामेश्वर जिला उद्योग अधिकारी, उस्ताद शायर अब्दुल मलिक अंसारी, राजकीय पॉलिटेक्निक के प्रवक्ता राघवेंद्र सिंह डॉक्टर अनुज भदौरिया सहित कई विद्वतजनों ने पुस्तक की समीक्षा करते हुए अपने उदगार व्यक्त किए.

“मखमली धूप में” काव्य संग्रह की एक कविता पंचनद तीर्थ जो जालौन की विशेषता को प्रदर्शित करता है उस पर बनी लघु फिल्म जो सौरव निरंजन के निर्देशन में बनी है. उसका भी प्रदर्शन सभागार में किया गया.जिसको काफी सराहना मिली.


समारोह के दूसरे सत्र में कवियत्री प्रिया श्रीवास्तव दिव्यम की वाणी वंदना और अख्तर जलील की नातेपाक से गीत गजल और मुक्तकों का दौर चला. जिसमें गरिमा पाठक ने अमरेंद्र रचित वंदना है नमन विनापाणी से वर दिजीये प्रस्तुत की. वरिष्ठ साहित्यकार पंडित यज्ञदत्त त्रिपाठी के जन्मदिन पर उन्हें साहित्यिक काव्य गजल और शायराना अंदाज में कलमकारों ने शुभकामनाएं दी.

इस मौके पर सुप्रसिद्ध कवित्री डॉ.माया सिंह वरिष्ठ कवित्री विमल तिवारी विमल, साकी साहब, इंदु विवेक उदेनिया, संस्कृत विद्वान राम शंकर गौर, प्रिया श्रीवास्तव दिव्यम,सिद्धार्थ त्रिपाठी, गीतकार पुष्पेंद्र पुष्प, संजीव त्यागी, अनुज भदोरिया, राघवेंद्र कनकने, विनोद गुप्त भावुक लखनऊ, ब्रह्म प्रकाश अवस्थी शिरोमणि सोनी,प्रियंका शर्मा, प्रगति मिश्रा वीरेंद्र तिवारी, दिव्यांशु दिव्य, अभिषेक सरल ,शिवा दीक्षित, सौरभ निरंजन,कमलेन्द्र श्रीवास्तव,गरिमा पाठक अवध जी राहुल सिंह, सेंगर शिवम सोनी,असरार मुक़री,संजय शर्मा, सहित अन्य लोगों ने काव्यपाठ किया। अंत में सभा के अध्यक्ष अनुज भदौरिया ने यगदत्त त्रिपाठी और डाँ अमरेंद्र पौत्स्यायन को शॉल और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

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