प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत 23 हजार से अधिक महिलाओं की हुई जांच
सोनभद्र . कोविड-19 संक्रमण के दौरान स्वास्थ्य विभाग सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं के साथ अन्य चिकित्सकीय सेवाओं को उपलब्ध कराने में जुटा है. जिसके तहत मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने हेतु जिले में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान चलाया जा रहा है. जिसके अंतर्गत गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व जांच तथा प्रसव उपरांत स्वास्थ्य सेवाओं से उन्हें लाभान्वित कराया जा रहा है.
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक रिपुंजय श्रीवास्तव ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत जनपद के जिला अस्पताल सहित 10 स्वास्थ्य इकाइयों पर महीने की 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच, उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का चिन्हीकरण कर उनका समुचित तरीके से उपचार करते हुए आयरन की निशुल्क गोलियां वितरित की जाती है जिससे वह स्वस्थ रहें.
उन्होंने बताया कि जिले में लॉकडाउन के दौरान वर्ष 2020-21 में अप्रैल व मई 2020 को छोड़कर अब तक 1614 महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच की गई. जिसमें से 161 उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को चिन्हित कर उनका इलाज किया गया. उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं की उच्च रक्तचाप, वजन, मधुमेह एवं यूरिन तथा अल्ट्रासाउंड के साथ अन्य जांच निशुल्क किया गया। हाई रिस्क वाली गर्भवती महिलाओं को आयरन फोलिक एसिड देकर उनका नियमित सेवन करने की सलाह स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा दी गई. इसके अलावा कोरोनावायरस संक्रमण के बचाव हेतु साबुन से बार-बार हाथ धोने, मुंह पर मास्क लगाने तथा बेवजह घर से बाहर न निकलने का परामर्श दिया गया जिससे वह कोरोना संक्रमण की चपेट में न आने पाए.
जिला कार्यक्रम प्रबंधक के मुताबिक बेहतर पोषण गर्भवती महिलाओं में खून की कमी होने से बचाता है ऐसे में उन्हें हरी सब्जी, फल ,सोयाबीन ,चना एवं गुड़ का सेवन करना चाहिए। इसके अलावा गर्भावस्था के आखिरी दिनों वाली महिलाओं को दिन में चार बार खाना चाहिए जिससे वे स्वस्थ रहें. उन्होंने बताया कि वर्ष 2019-20 में मार्च 2020 को छोड़कर 22371 महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच की गई जिसमें से 1228 उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को चिन्हित किया गया जिनका समुचित तरीके से जांच कर उपचार कराया गया और बेहतर पोषण उपलब्ध हो सके इसके बारे में जानकारी देते हुए आयरन की गोलियां वितरित की गई हैं. उन्होंने बताया कि बेहतर पोषण होने से प्रसव के दौरान महिलाओं में होने वाली जटिलता में काफी कमी आ जाती है साथ ही मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में भी कमी आ जाती है.